कोटि-कोटि है वंदन प्रभु जी ,
मीटा हृदय का क्रंदन प्रभुजी।
इंतजार का हर बंधन है टूटा ,
उत्साह का देखो आनंद है फूटा।
करबद्ध यह जग खड़ा है तेरा ,
स्वागत वंदन अभिनंदन है तेरा।
भाग्य बना सौभाग्य प्रभु जी ,
हम शबरी तुम राम प्रभु जी ।
दीप जलाऊं,थाल सजाऊं ,
घर पर वंदन वार लगाऊ।
फूल बिछाऊ,जय माल चढ़ाऊ ,
स्वाद स्वाद का भोग लगाऊ ।
हुआ धरा पर फिर अवतरण प्रभु जी ,
मिले फिर तुम्हारे कमल चरण प्रभु जी ।
चरण पाखरु , नजर उतारु ,
रामलाला का स्वरूप निहारु ।
पड़ी भवसागर थी, हर नाव प्रभु जी।
तर गया फिर से यह जग सारा,
जो पड़े धरा पर तुम्हारे पांव प्रभु जी।
पुनः आगमन से बंधी एक आस प्रभु जी ,
मीटी युगो युगों की हर त्रास प्रभु जी ।
प्रभु के श्री चरणों कोटी -कोटी प्रणाम🚩🚩
स्वरचित
© भारती नामदेव
इन्दौर (म. प्र.)
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