Wednesday, January 31, 2024

आ. कु. मेघा शर्मा

अब श्रृंगारित है पुष्पों से,

अलंकृत हुए हैं बंधनवार।

सजे रंगबिरंगी रंगोली

संग चमकते दीपो की कतार।।

हुआ सु सज्जित स्वर्ग सा,

श्रीअयोध्या में राम दरबार।

गुंजित है लंबे वनवास के बाद,

अब लौटे हैं मेरे सरकार।।

हुआ शंखनाद श्रीराम नाम का,

अब है मंगलमय त्यौहार।

चहुंओर श्रीराम से ही सुख समृद्धि,

है धन धान्य की बहार।।

फलीभूत है पिता पुत्र सा प्यार,

हुआ भक्तो का सपना साकार।

श्रीअयोध्या में राममंदिर ने,

लंबी प्रतिक्षा बाद लिया आकार।।

यह जन्म सफल हमारा,

प्राप्त हुआ अक्षत निमंत्रण उपहार।

हम सौभाग्य से इस वर्ष मनायें,

दीपो की दिवाली दो बार।।

हम सबके राम है सबमें राम,,

है राम नाम ही जीवनाधार।

अनुभूत है हर क्षण हर पल,

मेरे राम की महिमा अपरम्पार।।

देखो शीत नहीं यह रामलहर की धूम मची है सबके गृह द्वार।

मानो निर्जीव जग में आए प्राण, राममय हुआ संपूर्ण संसार।।

– मेरी गुल्लक ‘शब्दों का संग्रह’
© कु. मेघा शर्मा

आ. बिंदेश कुमार झा

राम आएंगे तो क्या होगा


शुष्क धरा नम हो जाएगी
जीवन के नए फूल खिलेंगे,
जो शीतल वर्ण के होंगे
जो स्वतंत्र निडर होकर रहेंगे।

हीन भावना की जड़ें
शुष्क हो बिखर जाएगी,
वो निष्क्रिय हो इस धरा पे
कहीं खो जाएगी।

इस नभ के सभी नभचर में
अस्तित्व में कभी भेद न होगा,
असमान भी समान हो जाएंगे
जब हृदय में कोई खेद न होगा।

पर यह होगा तो तब ही
जब प्यास बुझा लोगे एक जल से,
 प्रेम ,सम्मान ,शांति का विस्तार होगा
इस नवीन प्रवीण पहल से।

© बिंदेश कुमार झा

आ. कीर्ति देवानी

मेरे राम।।
राम राम राम
दो अक्षर का प्यारा नाम
राम राम राम राम।।

जीवन का आधार
राम राम
साचा है ये नाम,
राम राम।

तुझ में भी राम।
मुझ मे भी राम।
सब के दिल मे,
बसे हैं राम राम।

धरती भी राम।
अंबर भी राम ।
सृष्टि के हर,
कण कण में हैं राम राम।

आरम्भ भी राम।
अंत भी राम नाम।
बिन राम नाम,
सब हैं पूर्ण विराम।

जब राम नाम
संग हैं।
फिर किस बात
का डर हैं ।

काल भी करे
जिसको प्रणाम।
ऐसा हैं राम नाम
राम नाम राम राम।

पति पावन।
मोक्ष दायन।
भज मन प्यारे
राम राम राम।

कीर्ति की कलम ✍🏻
कीर्ति देवानी
नागपुर महाराष्ट्र

आ. वर्षा शिवांशिका

सीता –राम विवाह
 
श्रीराम की लीला राम ही जाने,
इसको वेद पुराण बखाने। 
                   चरणों में शीश झुकाकर, 
                   कथा सुनो भजन में गाकर।।

राजा जनक की नंदिनी 
सीता हो गई सयानी ।
                    कर रहे, विवाह रचने की तैयारी, 
                   हर्षित राजा-रानी और जनकपुरी सारी।।
                   
पावन दिन है, आज रमणा, 
स्वयंवर की हुई घोषणा।
                  जो शिव-धनुष उठाएगा ,
                  वैदेही का वही वर कहलाएगा।।  

शिव धनुष को जब
रघुवीर ने उठा लिया। 
                    राजीव का चयन स्वतः तब,
                    रामप्रिया ने मन में किया।।

सुन्दर वनमाला हाथ में ले खड़ी, 
हरिप्रिया मंडप की ओर बढ़ी ।
                      दोनों ने एक-दूसरे को अपनाया,
                      मैथिली ने जब जयमाला पहनाया।।

शुभ घड़ी जो आई, 
सिया राम जी की हुई। 
            रोली-तिलक शोभित, मस्तक पर स्वर्ण मुकुट विराट, 
         अद्भुत शोभा रामचन्द्र की, लगे तीनों लोकों के सम्राट ।।

सदैव जोड़ी साथ रहे, मिलजुल कर,  
बाराती बोले खुश रहे अब खिलकर ।
                   मिलकर प्रेम मिलाप से जीवन बिताना,
                    आप केवल सिया जी का साथ निभाना।।

राम-सिया की है आदर्शतम जोड़ी,
जनमानस पर अमिट छाप छोड़ी।
                     सीताराम कथा ,जग में कहे हर जुबानी,
                     कौशल नगर में, जनता हो गई दीवानी।।
                                                    
    जनकसूता संग दर्श अभय, जय जय सिया रामचंद्र की जय। 

- © वर्षा शिवंशिका
स्वरचित सर्वाधिक सुरक्षित

आ. नेहा मिश्रा

फर्ज़ अपना निभाने चलीं जानकी।

अंक में भरके तम को सवेरा हुआ
है उषा, पर तिमिर क्यूं घनेरा हुआ,
शुभ घड़ी की प्रतीक्षा सभी को थी पर
काल से काल का ऐसा फेरा हुआ।
धर्म से आज बाज़ी लगी प्राण की;
फर्ज़ अपना निभाने चलीं जानकी।

हैं कृपासिंधु राघव हमारे प्रभू 
मात सीता की छवि को निहारें प्रभू,
पंथ सोचें अगम और देखें सिया
मन ही मन में ये बातें विचारें प्रभू।
कैसे वैदेही वन में रहेंगी भला
है सुमन-सी सुकोमल कली जानकी;
फर्ज़ अपना निभाने चलीं जानकी।

राजसी वस्त्र का त्याग करके चलीं 
मां सिया जोगिया वेश धर के चलीं,
है सजल नेत्र अधरों पे मुस्कान है
अश्रु आंखों में सबके वो भरके चलीं ।
आज कण-कण अवध का ये कहने लगा
धन्य हो मात वसुधा जनी जानकी;
फर्ज़ अपना निभाने चलीं जानकी । 

© नेहा मिश्रा 

आ. प्रमिला सैनी जी


मन - दर्पण में राम
तुझ में राम,मुझमे राम,
संसार के कण - कण में राम।

नभ में राम, जग में राम,
जीवन के हर क्षण - क्षण में राम।

पशु में राम,पक्षी में राम,
प्रकृति के तृण-तृण में राम।

पुरुष में राम ,नारी में राम,
संघर्षों के रण क्षेत्र में राम।

रिश्तो के कारण में राम,
भावनाओं की वीणा में राम।

भार्या के प्रणय निवेदन में राम,
प्रेयसी के मुख अरुण में राम।

इन श्वासों की हिरण सी दौड़ में राम,
दिल की धड़कन के खण्ड- खण्ड में राम।

उत्तर में राम,दक्षिण में राम,
हमारे हर उद्देश्य को पूर्ण करते राम।

कर्मो के हर दण्ड में राम,
जीवो के भरण पोषण में राम।

जीवन के कारण में राम,
हमारे हर कल्याण में राम।

सूरज की किरण में राम,
जन जन के हर गण में राम।

क्षणभंगुर इस जीवन मे राम,
करते प्रणाम हम तुमको राम।

कण - कण में राम ,क्षण - क्षण में राम,
मेरे मन दर्पण में राम,
करती तन मन तुमको अर्पण राम।

आपकी अपनी हंसती मुस्कुराती सखी

© प्रमिला सैनी

Tuesday, January 30, 2024

आ. अनिल पांचाल सेवक जी

प्रतियोगिता हेतु .....
सादर प्रेषित 🙏 

*राम क्या है ?*
~~~~~~~~~~~✍️

*राम क्या है तुम्हें मैं दिखाऊं....2*🌷
*राम क्या है तुम्हें मैं बताऊं....2*🌷
____&&&___&&&____

*राम कथा भी है राम किरदार है।*
*राम रघुकुल की मर्यादा के आधार है।।*
*राम दृष्टि भी है राम द्रष्टा भी है।*
*राम सृष्टि भी है राम स्रष्टा भी है।*।

*राम क्या है........🌷*

*राम शक्ति भी है राम भक्ति भी है।* 
*राम मुक्ति भी है राम अनुरक्ति भी है।।*
*राम संगीत है राम प्रेम गीत है।*
*राम ही प्रीत है राम मनमीत है।।*

*राम क्या है.....🌷*

*राम तप भी है राम ही त्याग है।*
*राम ही वितराग है राम अनुराग है।।*
*राम सरोवर भी है राम सागर भी है।*
*राम नटवर भी है राम नागर भी है।।*

*राम क्या है........🌷*

*राम आस भी है राम विश्वास है।*
*राम भोग भी है राम ही प्यास है।।*
*राम चेतना भी राम चिंतन भी है।*
*राम नृत्य भी है राम कीर्तन भी है ।।*

*, राम क्या है.....🌷*

*राम कर्ता भी है राम ही कर्म है।*
*राम ही धर्म है राम मूल मर्म है।।*
*राम साकार है राम निरा कार है।*
*राम संसार से लगाते भव पार है।।*

*राम क्या है तुम्हें मैं दिखाऊं....2*🌷
*राम क्या है तुम्हें मैं बताऊं....2*🌷

----&&----&&---&&---
© अनिल पांचाल सेवक

Monday, January 29, 2024

आ. के पी एस चौहान जी

अवध में राम आए हैं।
=============
बाईस जनवरी साल ,
दो हजार चोवीस को,
सब देश-वासियों नें,
मंगल गीत गाए हैं।
अवध में राम आए हैं।।

खत्म हुई सदियों की प्रतीक्षा,
हम सब ने घर-द्वार सजाए हैं।
चौदह बरस वन में बिताए हैं,
सांथ माता-सिता को लाए हैं।
पहली दिवाली मनाई थी, 
लंका पर विजय पाने की।।
आज दिवाली मना रहे सब,
 रामजी के अयोध्या आनें की।
आज सबने शुभ दीप जलाए हैं।
अवध में राम आए हैं।।

आह्वान मेरा है देशकी तरुणांई से 
पथ विचलित मत हो जानां ,
तुम कहीं झूंठी वाह-वाही से।
राम जन्मभूमि इतिहास ,
लिखा कार सेवकों नें,
अपनें लहू की स्याही से।।
पूरे देश से चुन-चुन कर ईंट,
पत्थर और सिलाऐं लाए हैं।
अवध में राम आए हैं।।

शहिदों नें देखा था यहां ,
श्री राम जी के लिए सपनां।।
एक दिन जरूर बनेगा यहां,
 भव्य श्री राम मंदिर अपनां।।
देश के युवाओं नें शपथ उठाई
सब ने सौगंध राम की खाई।।
मंदिर वहीं बनाएं हैं,
अवध में राम आए हैं।।

सनांतनियोंकी हुई पूरी इच्छा,
खत्म हुई शादियोंकी प्रतीक्षा।
पूरे विश्व में बजनें लगा है,
प्रभु श्री राम जी का डंका।
ऐसा लगनें लगा है जैसे,
 जीत कर आए हो लंका।
घर-घर बंटी बधाई सब नें,
 खुशियों संग मंगल गाएं हैं।
अवध में राम आए हैं।।

जग-मग उठे धरती आकाश,
होने लगा स्वर्ग सा एहसास।
मिलकर सब नर-नारियों नें,
 मंदिर वंदन-वार सजाएं हैं।
बाईस जनवरी साल दो,
 हजार चोवीस को घर-द्वार ,
मंदिर-मंदिर दीप जलाए हैं ,
अवध में राम आए हैं।।
=================

© आशु कवि-"शिक्षक"लायन' के.पी.एस.चौहान"आरजू "लायन"फोटोग्राफर-
सब-रस कवि
 मालवी एवं हिंदी हास्य
 व्यंग लेखक साहित्यकार 
 गुरान सांवेर इंदौर(म.प्र.)
मों नं.-98260 31513

आ. कुंवर अर्जुन सिंह


कौशल्या की आंख के तारे,
दशरथ जी के आप दुलारे।
डूबती नया करो किनारे, 
हे रघुनंदन राम हमारे।।

दशरथ जी के आंगन आए।
राम प्रजा के मन में समाए।।
मोहनी सूरत देख राम की,
दशरथ मन ही मनहर्षाए।।
जीवन नया तेरे सहारे,
                 हे रघुनंदन राम हमारे।।//2//1//

मात पिता का वचन निभाया।
त्याग महल वन को अपनाया।।
घास फूस का पंचवटी में,
राम ने सुंदर महल बनाया।।
                हे रघुनंदन राम हमारे।।//2//2//

निशाद राज को गले लगाया।
जातिवाद का भेद मिटाया।।
ना कोई ऊंचा, ना कोई नीचा,
प्रभु ने हमको ये समझाया।।
                ऐसे है प्रभु राम हमारे //2//3//

© कुंवर अर्जुन सिंह 

आ किरण विमलेश जैन जी

आज्ञाकारी पुत्र पिता की आज्ञा मानक़र, 
 वनवास सहर्ष चले ज़ाते हैं ।
त्रसकाय स्थावर ज़ीव को, करूणा बरसाते।
सुख-दुख को समता भाव से लेकर,
मुस्कान सदा बनाए रहें ज़ो,
ऐसे करूणानिधि हमारें, मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाते।

राजपुत्र ने त्याग दिए राज्य के सारे सुख 
रिश्तों के खातिर कांटो का पथ अपनाया।
भ्रात लख़न और संगिनी सिया संग़, ज़ो है वन को ज़ाते।
किंचित भी न विचलित कर पाया ज़िसे माता के वचनो का,
ऐसे करूणानिधि हमारें, मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाते।

मेरा भाग्य लिखा लेखनी ने ऐसा, क़ह सब़को बहलातें।
छल क़िया कैंकई ने ज़िसको, माता अपनी बतलातें।
सत्य,धर्मं,मर्यांदा को निज़, प्राणो से बढ़कर रख़ते,
ऐसे करूणानिधि हमारें, मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाते।

कानन-कानन भटकते घास-फ़ूस और कंद मूल फ़ल ख़ाते।
अपनी चरण धूलि से
पाषाण को ज़ो हैं नार ब़नाते।
वचन पर अडिग रहकर , बद्धता,आदर्शोंं का,अहं नहीं जो रख़ते,
ऐसे करूणानिधि हमारें, मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाते।
अपने भ्राता भरत का निश्छल प्रेम देख, उनक़ो फ़िर समझ़ाते।
सीख सिखा कर आदेशित कर ,धर्मं का पाठ पढ़ाते। जीवन को जिसने मर्यादा में जिया , अपने क़ुल को श्रेष्ठ ब़नाया,
ऐसे करूणानिधि हमारें, मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाते।

कहते हैं चौदह वर्ष का वनवास हुआ था राम को
नहीं ये गलत सुना है 
वनवास तो उनका अब तक चला 
जग को जीवन देने वाले , पड़े रहे पंडाल में 
प्रभु ने स्वयं जान लिया
मनुष्य जन्म आसान नहीं।
ऐसे करूणानिधि हमारें, मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाते।

© किरण विमलेश जैन 

Sunday, January 28, 2024

आ. वैदेही कोठारी

शीर्षक :- रामलला आए रे ! सुःख समृद्धि लाए रे
तुझमें 'राम', मुझमें 'राम' जहाँ देखो 'राम-ही-राम',
श्याम 'राम', 'सीता-राम', भगवा रंग है 'राम'!

जन्म पर कान में बोला पहला शब्द है 'राम',
जीवन के अंत समय में सबने बोला 'राम'!

मर्यादा पुरुषोत्तम चरित्र 'राम', सब चाहे पुत्र 'राम',
पति 'राम', भाई लक्ष्मण,भरत के प्यारे 'राम'!

जीवन को हर परिस्थिति में साधे ऐसा शब्द है 'राम',
सिर्फ दुःख में ही नहीं, सुःख में भी बोलो 'राम'!

हर रिश्ते को प्रेम से 'जीते' ऐसे चरित्र है 'राम',
जीवन के हर दुःख,संघर्ष में स्थिरता का सबक सिखाते है,'राम'!

'राम' मुद्दा नहीं, 'राम' राजनीति नहीं,
'राम' दिखावा नहीं, 'राम' ढकोसला नहीं,
हर ह्रदय को प्रेम से सराबोर करते है 'राम'!


दुःख की बात है, त्रेता में था चौदह वर्ष का वनवास, इस युग में भी पांच सौ वर्ष का वनवास बिताया तुमने 'राम'!

सुःख घड़ी आई रे!, आज खत्म हुआ वह वनवास रे!, अयोध्या में आए सुःख समृद्धि लाए, हमारे 'ललाराम' रे!

जीवन की चेतना है 'राम', जीवन का आधार है 'राम',
सत्य है 'राम', अहिंसा है 'राम', न्याय है 'राम', जीत है 'राम'!
जीवन जीने की कौशलता को सिखाता है 'राम'!

घर के आँगन में दीप जलाए, फुलझड़ी,पटाखे फोड़, एक बार फिर दीपोत्सव का उत्सव हर्ष उल्लास से मनवाया तुमने 'राम'!

'राम' से भी बड़ा 'राम' का नाम,
अब अंत हुआ अंधकार,!  
व्यक्ति के व्यवहार को करें साकार
'राम' नाम की महिमा अपरम्पार,!
'जय सियाराम'!!


नोट - यह रचना पूर्णतः मौलिक एवं अप्रकाशित है |

© वैदेही कोठारी 
स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखिका

आ. प्रिया प्रसाद जी

राम आगमन🪔🪔
•••••••••••••••••••••••••
कमलनयन छवि निराला,
श्याम वर्ण सुंदर मुख वाला।
नीलकमल है उपमा सोहै,
राम लला है सबसे प्यारा ।

राम नाम है सुख बरसावे,
सुन सुन हृदय ,मुख भी गावे।
सर्व पाप दुःख व्याधि मिट जावे,
रघुनंदन जब मन बस जावे ।

पधारो पुनः हे रघुराई ,
मर्यादित होय जन- जन।
राम युग है फिर आई,
धर्म पथ बिछा दो रघुराई।

ज्योत ज्ञान का जला,
दिवाली फिर सब ने मनाई।
हर घर दीप फिर जल जाए,
हर कंठ राम धुन को गाए।

भगवा हो गया अवधपुरी हमारा,
छू ले आसमान ध्वजा विशाला।
करुं आप से हम सब विनती रघुराई।
पधारो पुनः संग सिया आप क्षण है 
आई।

जय श्री राम बोल रहा है भक्त विशाला,
अंजनी पुत्र को सौ बार नमन हमारा।
सज जाए पुनः राम दरबार हमारे,
राम नाम से गुंजे धरती संग आसमान सारा।।

©प्रिया प्रसाद ✍️

आ. रेणु ओझा

आ गए अवध मे राम
••••••••••••••••••••
आ गए अवध में राम,
हृदय सुमन खिल उठा,
नयनों से छलकी आज फिर,
बही असुवन की धारा।
   
पूर्ण हुई आज प्रतीक्षा की घड़ी,
खुशियों से जग झुम उठा,
राम जी के आगमन से आज,
जगत पतित पावन हो उठा।

हर घर आज बनी अयाेध्या,
घर घर मे राम विराजे है।
सदियों की प्रतीक्षा को आज,
हमने पूर्ण विराम लगा दी है।

आज पावन हुई है धरती,
राम नाम के गुंज से,
जीत हुई सत्य सनातन धर्म की,
जय बोलो रघुवीर की।
             – रेणु ओझा

आ. भूपेन्द्र कण्डारी

राम नाम 
*********************
राम हमारे आराध्य हैं
हमारे पूज्य है।

सब राम की माया
सब राम की ही छाया।

राम घट घट वासी हैं
राम सर्वव्यापी हैं।

राम मर्यादित है
राम धैर्य का प्रतीक है।

राम नैतिकता के
पालनहार है 

राम जगल कल्याणकारी है
राम आज्ञाकारी हैं

हर क्षण में राम है
कण कण में राम है।

अयोध्या में विराजे हमारे
आराध्या राम है ।

जय श्री राम
जय सीता राम।

©भूपेन्द्र कण्डारी

Friday, January 26, 2024

आ. राजेश ब्रह्ममवेद

जन के मन में राम हमेशा
कण कण में है राम हमेशा
 मर्यादा और सत्य के रक्षक
 मेरे प्यारे राम हमेशा

 परम प्रतापी अवध के राजा
 सोचा ना था वनवास जाएंगे
 भव्य भवन का राज छोड़कर
 कठोर वचन निभाएंगे

 राम भक्त बनना हो तो
तुम बनना हनुमान 
 धूल चटा सको रावण को तुम
 रख कर प्रभु की शान 

 कलयुग में भी देखो तो
 राम ही राम का नाम है
 चारों तरफ है ध्वजा राम की
राम ही राम भगवान हैं

© राजेश ब्रह्ममवेद
इंदौर

Monday, January 22, 2024

आ. महाश्वेता राजे जी

प्रभु श्री राम की जय हो 
 हे !राम तुम्हारी रामायण जन-जन को प्यारी लगती है
 प्रभु तेरे चरित की गाथा हर युग अमर रहेगी|
 हे!राम तुम्हारी रामायण जन -जन को प्यारी लगती है...
बाल रूप धर माँ कौशिल्या प्रभु तुमने ही को धन्य किया,
 पितृ आज्ञा शिरोधार्य कर प्रभु तुमने ही वन गमन किया , 
अपने आदर्श चरित से जन- जन को राह दिखाई|
 हे !राम तुम्हारी रामायण जन जन को प्यारी लगती है
 प्रभु तेरे चरित की गाथा हर युग में अमर रहेगी |
अत्याचारी बलि का वध कर राज्य सुग्रीव को प्रभु तुमने ही दिलवाई ,
सदा अन्याय पे न्याय की जीत प्रभु तुमने ही
 करवाई |
महाभयंकर रावण का वध कर राज्य विभीषण को प्रभु तुमने ही दिलवाई ,
सदा असत्य पे सत्य की विजय प्रभु तुमने ही करवाई|
तेरे चरणों में ध्यान लगाकर ,तेरे रूप का दर्शन पाकर, नतमस्तक हम होते बारम्बार,
  हे!राम तुम्हारी रामायण जन -जन को प्यारी लगती है ...
प्रभु तेरे चरित की गाथा हर युग में अमर रहेगी|..

(अपने प्रभु श्री राम को शब्द रुपी पुष्प समर्पित है आपकी महाश्वेता )

आ. ललित महालकरी जी

श्री राम कहां से आते हैं
श्री राम कहां से आते हैं
 कहीं नहीं वे जाते हैं
निराकार स्वरूप में वो
दिल में सांची ज्योत जगाते हैं" ।

"साकार की भी महिमा भारी
भक्तों की भक्ति की बलिहारी
बड़ी मुश्किलों से ये अवसर आया
अयोध्या धाम विराजे हैं 
श्री राम प्रभुजी सुखकारी" ।

प्रेषक 
© ललित महालकरी 
B-153,न्यू कॉलोनी
नेपानगर-450221 
जिला- बुरहानपुर
मोबाइल नंबर-9926362031 
ईमेल आईडी-lalit.mahalkari@gmail.com

Sunday, January 21, 2024

आ. संध्या गुप्ता जी

‘हे राम! तुम्हारा अभिनंदन’
हे राम! तुम्हारा अभिनंदन,शीश झुका कर करती हूँ।
हो राम राज अब सदा यहाँ, यही प्रार्थना करती हूँ।।
जागा है भाग्य अयोध्या का, इसकी साक्षी बनती हूँ।
हे राम! तुम्हारा अभिनंदन,शीश झुका कर करती हूँ।।

बेला थी वह त्रेता युग की, जब जन्म लिए थे रघुराई।
लल्ला की देख के पहली छवि, कौशल्या मन में हर्षाई।।
आँगन में थिरकें राम लला, यही कामना रखती हूँ।
हे राम! तुम्हारा अभिनंदन,शीश झुका कर करती हूँ।।

लौटे हैं राम अयोध्या में, धन्य भई नगरी सारी।
देखन को राम लाल प्यारे, उमर पड़े हैं नर-नारी।।
इक झलक मुझे भी मिल जाए, यही आस मैं रखती हूँ।
हे राम! तुम्हारा अभिनंदन,शीश झुका कर करती हूँ।।

शबरी के झूठे बेरों से, भेदभाव झुठलाया था।
केवट को गले लगा करके, समता भी सिखलाया था।।
फिर से मानवता सिखलाना, यही चाह मैं रखती हूँ।
हे राम! तुम्हारा अभिनंदन,शीश झुका कर करती हूँ।।

तिथि द्वादश पौष माह की जो, सदा याद की जाएगी।
कलयुग में त्रेता लौटा है, नव इतिहास रचाएगी।।
मर्यादित बने इनसान यहाँ, यही प्रार्थना करती हूँ।
हे राम! तुम्हारा अभिनंदन,शीश झुका कर करती हूँ।।

स्वरचित ✍️
संध्या गुप्ता
हेलीमंडी, पटौदी

आ. मोनिका डागा आनंद जी

रामोत्सव 
महकी है फुलवारी, सजी है अयोध्या सारी,
 उत्सव तू भी मना रे, रंग तू भी ले सजा ।
छवि पर बलिहारी, आरती करें पुजारी,
मंगल कीर्तन करे, ढोल नगाड़े बजा ।
सबसे मंगलकारी, नाम ये आनंदकारी ,
हर लेता दुःख सारे, अमृत ये उपजा।
कोई कहे हितकारी, कोई कहे सुखकारी,
भव सागर से तारे, दीपक तू भी जगा।
पूजे सब नर नारी , दर्शन दो एक बारी,
हम तो जीवन हारे, रट राम की लगा।
विनती सुनो हमारी, शरणागत तिहारी,
मेरे तुम ही सहारे, सोए भाग्य तो जगा।
दुनिया कहती सारी, जप लो सोच विचारी,
 संगीत गुन गुनारे, घुन राम तू भी गा।
  - मोनिका डागा "आनंद" , चेन्नई
आपके स्नेह और प्यार का धन्यवाद !💕
रचना ( स्वरचित व सर्वाधिकार सुरक्षित) ✍️
LOVE YOU ZINDAGI 🙏♥️🙏

आ. संजना विश्वकर्मा

मधुर बेला सजी आज मेरे सिया राम आये हैं।
बड़े दिन बाद दिन आया हैं,
मेरे प्रभु राम आये हैं।
स्वर्ण सिंघासन कनक भवन में,
संग सिया के बैठेंगे,
ये तो बड़ा स्वप्न था जिसको,
पूर्ण होते हम देखेंगे.
राम नाम की रट्ट ये लगी हैं,
 कितनी सुन्दर प्यारी छवि हैं,
ये अदभुत क्षण में देखूँ,
मेरे सरकार आये हैं,
कड़ी तपस्या राम भक्तो की,
अब तो अनेको वरदान आये हैं।
ढ़ोल बजेंगे, साजेगी अवध नगरी,
सबके मन में बसें हैं राम,
मुख में राम नाम आये हैं।
हिन्दू राष्ट्र में हिन्दुओ के दाता,
निवास कर रहे थे बिन छत के,
देश उन्ही का, नाम उन्ही का,
 फुर भी वंचित थे वो घर से,
 आज हिन्दुओ के ये सपने पुरे होने आये हैं,
ये सम्मान हैं मेरा ये अभिमान हैं मेरा,
मेरे प्रभु राम आये हैं, मेरे श्री राम आये हैं।

🙏🏻🙏🏻🚩🚩🌹🌹
© संजना विश्वकर्मा
भोपाल मध्यप्रदेश

आ. बलराम सोनी

चलो अयोध्या धाम.....
अयोध्या धाम सभी को पुकारे
चलो चलते हैं राम जी के द्वारे

बहुत ही सुन्दर वहां के नजारे
समय बितायें सरयू के किनारे

चलो चलकर वहां सब निहारें
राम ही तो हैं सबके तारनहार

राम जी ही करते हैं बारे न्यारे
चलो हम सब लगायें जयकारे

भव्य मंदिर हम सब ही निहारें
बिराजेंगे वहीं राम लला हमारे

दर्शन कर इस जिंदगी को तारें
राम के आदर्श जीवन में उतारें

राम तुम्हारे है और राम हमारे
राम ही हैं जगत के पालनहारे

हम सब ही हैं उसके ही सहारे
वह ही लगाते नैया को किनारे

अच्छे भाग्य हमारे और तुम्हारे
देखेंगे जो धाम के सुंदर नजारे

प्रेम से बोलो जय श्री राम सारे
हम सबका जीवन राम ही तारें

22 जनवरी को मंदिर घर द्वारे
हर एक जगह दीपक उजियारें

उत्सव ही मनायें उस दिन सारे
प्रभु राम की सब आरती उतारें
    स्वरचित:- बलराम सोनी
      ललितपुर-उत्तर प्रदेश

आ. भारती नामदेव जी

"भाग्य बना सौभाग्य "
कोटि-कोटि है वंदन प्रभु जी ,
मीटा हृदय का क्रंदन प्रभुजी।
इंतजार का हर बंधन है टूटा ,
उत्साह का देखो आनंद है फूटा।
करबद्ध यह जग खड़ा है तेरा ,
स्वागत वंदन अभिनंदन है तेरा।
भाग्य बना सौभाग्य प्रभु जी ,
हम शबरी तुम राम प्रभु जी ।
दीप जलाऊं,थाल सजाऊं ,
घर पर वंदन वार लगाऊ।
फूल बिछाऊ,जय माल चढ़ाऊ ,
स्वाद स्वाद का भोग लगाऊ ।
हुआ धरा पर फिर अवतरण प्रभु जी ,
मिले फिर तुम्हारे कमल चरण प्रभु जी ।
चरण पाखरु , नजर उतारु ,
रामलाला का स्वरूप निहारु ।
पड़ी भवसागर थी, हर नाव प्रभु जी।
तर गया फिर से यह जग सारा,
जो पड़े धरा पर तुम्हारे पांव प्रभु जी।
पुनः आगमन से बंधी एक आस प्रभु जी ,
मीटी युगो युगों की हर त्रास प्रभु जी ।
प्रभु के श्री चरणों कोटी -कोटी प्रणाम🚩🚩
स्वरचित 

© भारती नामदेव
इन्दौर (म. प्र.)

आ. पूनम सिंह भदौरिया जी

इतने दिन का बनवास काट आखिर में घर को आयेंगे,
प्रभु के आने पर हम सब तो नगरी और द्वार सजाएंगे।।
बोलो राम बोलो राम बोलो राम बोलो राम।
सियाराम सियाराम बोलो राम बोलो राम।।

गूंजेगा सारा इंद्रलोक धरती पाताल भी गूंजेंगे,
सिया और लखन हनुमान को भी प्रभु जब भूमि धरा पर लायेगे।
प्रभु के आने पर हम सब तो नगरी और द्वार सजाएंगे।।
बोलो राम बोलो राम बोलो राम बोलो राम।
सियाराम सियाराम बोलो राम बोलो राम।।

तुम विश्व विधाता ब्रह्म रूप तुम ही इस जग के दाता हो,
मर्यादा में रहते हो तुम ये इस दुनिया को बतलाएंगे।
प्रभु के आने पर हम सब तो नगरी और द्वार सजाएंगे।।
बोलो राम बोलो राम बोलो राम बोलो राम।
सियाराम सियाराम बोलो राम बोलो राम।।

हम सनात्तनी है सत्यप्रेम और मानावता को जीते है,
श्रीराम नाम लेकर के हम आक्रांतायों को हराएंगे।
प्रभु के आने पर हम सब तो नगरी और द्वार सजाएंगे।।
बोलो राम बोलो राम बोलो राम बोलो राम।
सियाराम सियाराम बोलो राम बोलो राम।।

खुशियों में डूब गया है विश्व अब राम राज फिर आएगा,
जब शबरी, भील निषाद,सभी प्रभु से मिलने को आयेंगे।
प्रभु के आने पर हम सब तो नगरी और द्वार सजाएंगे।
बोलो राम बोलो राम बोलो राम बोलो राम।
सियाराम सियाराम बोलो राम बोलो राम।।

© पूनम सिंह भदौरिया
स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित

Saturday, January 20, 2024

आ बलवंत सिंह राणा

राम तो इस जहाँ में रोज आते हैं,
कहीं खुशियां कही गम दे जाते है।
आज वो अयोध्या को रैन बसैरा बना रहें है,
कुछ पल विश्राम करे, रुकें पल भर वो
अयोध्या को आराम गृह बना रहें है।
कण कण में उनकी आत्मा का वास है,
इसलिए अयोध्या उनकी निवास स्थान है।
जन्मों जन्मों की आज खुशी आई, 
दशरथ संग जन–जन की आंख भर आई।
चारो तरफ धरा–अंबर में रज रज मुस्कुराया।।


राम संग चारों भाई अयोध्या में आएं,
कैकयी, सुमित्रा ,कौशल्या की गोद में,
युग–युगांतर की खुशियां लाएं,
समय करवट लेता रहता है,
अपना रंग बदलता रहता है,
राजा हो या रंक उनके कर्मों का लेखा–जोखा,
जन्म से मरण तक चलता रहता, 
भगवान को भी वन गमन करना पड़ा,
कितनो के जीवन को निवार्ण दिया,
पग–पग पर पीड़ा बाधाये हंसकर सीने से लगाएं, 
जन-जन को मानवता का पाठ पढ़ाया,
इस कलयुग में फिर धरा पर आ रहे हैं।
कन– कन को हर्षित करके जीवन में खुशी ला रहे हैं।।

अंत भला सब भला होगा, मेरे राम आ रहे हैं,
उम्मीद का दीया फिर जल उठा है,
राम नाम की जप माला घर-घर गूंज रही,
केवल प्राज प्रतिष्ठा तक राम के आदर्शो का गमन होगा,
मानव के अंदर जागृत राक्षस का नाश होगा,
यही प्रशन विचलित कर जाता है, 
अंत: में कुछ देर यही सोचता हर पल,
सब आज तक ही सीमित है जहां मे,
कल से तो राम भी अनभिज्ञ थे,
इसलिए रामराज्य को पल भर में त्यागा,
यह तो कलयुग की माया है,
इसलिए हर मुख पर राम और अंदर काली छाया है।
लेकिन जो लेते उसी पल राम नाम का,
वो इस भव सागर से तर जाता है।

आ. कमल पटेल जी

जागे-जागे हमारे भाग
(धुन-जाने कितने दिनों के बाद गीत के तर्ज पर)

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जागे-जागे हमारे देखो भाग !
                अवध में राम आएं हैं...
जागे-जागे रे देखो मेरे भाग।
                अवध में राम आएं हैं...
जाने कितने दिनों के बाद,
                अवध में राम आएं हैं...
                 महल में राम आएं हैं…
                 भवन में राम आएं हैं...
जागे-जागे...

राम लला के दर्शन पाऊं,
जीवन को में धन्य बनाऊं।..... ×2
आई घड़ी वो बरसों बाद,
आई घड़ी वो बरसो बाद।
               अवध में राम आएं हैं...
                महल में राम आएं हैं...
                भवन में राम आएं हैं...
जागे-जागे...

अवध में काली रात थी छाई,
          बीत गई वो घड़ी दुखदाई। ×2
 आई फिर से नई प्रभात,
 आई फिर से नई प्रभात।
                अवध में राम आएं हैं...
                महल में राम आएं हैं…
                भवन में राम आएं हैं...
जागे-जागे...

घर-घर दीप की ज्योति जलाएं,
            वंदनवार से घर को सजाएं। ×2
चलो मनाएं दिवाली आज,
चलो मनाएं दिवाली आज।
                  अवध में राम आएं हैं...
                  महल में राम आएं हैं...
                  भवन में राम आएं हैं...
जागे-जागे हमारे देखो भाग,
                 अवध में राम आएं हैं...
स्वरचित-
© *कमल पटेल* , ग्राम : चकरावदा

आ. संजय डागा हातोद

श्री राम आएंगे
________________________
वर्षों की प्रतीक्षा के बाद
श्री राम अयोध्या आएंगे,
चलों अयोध्या सब नर-नारी
सरजू के तीर मंगलगीत गाएंगे ।।
बहुत उठाएं कष्ट अब तक
अब सिंहासन पर शान से 
होंगे विराजमान रामजी
आयेगा धरा पर रामराज
देवी-देवता हर्षाएंगे ।।
--------------------------------------
- © संजय डागा हातोद

Friday, January 19, 2024

आ सुशील चन्द्र बाजपेयी

हृदय के स्पंद हो तुम।
ऊर्जस्वित प्राण करते
आदि कवि के छंद हो तुम।
हृदय के स्पंद हो तुम।

जन्म जन्मान्तर से परिचित,
किन्तु नयनों ने न देखा।
अन्तर्गुहा के घन तिमिर में,
प्रज्वलित बन रश्मि रेखा।

तुम मेरी आराधना के,
साधना के देवता हो,
आदि सीमाहीन, फिर भी
पुतलियों में बन्द हो तुम।
हृदय के स्पंद हो तुम।

एक ही आधार हो तुम,
इस विश्व पारावार में।
यदि नहीं तुम हुये अपने,
फिर शेष क्या संसार में।

सघन स्वप्निल शून्यता में,
सत्य शिव सुन्दर तुम्हीं हो,
शान्ति सुख की सर्जना में,
सहज परमानन्द हो तुम।
हृदय के स्पंद हो तुम।

© सुशील चन्द्र बाजपेयी
लखनऊ (उ.प्र.)

किशोरी लाल जैन बादल जी

22 जनवरी 2024 
शीर्षक : शुभ मंगल दिवस मनाएं
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भारत के जन जन प्राणी का,
     महा पुण्य उदय में आया है।
 राम लला की प्राण प्रतिष्ठा,
     भव्य मंदिर अवध बनाया है।।

 बरसों टेंट में श्री राम रहे,
    अब नवनिर्मित मंदिर में आएंगे।
 अलौकिक महिमा मंदिर की,   
    अब अयोध्या धाम में पाएंगे।।

 22 जनवरी 24 को,
     शुभ मंगल दिवस में आया है। 
 भारत भूमि के नगर नगर,
     शुभ संदेश सबको लाया है।।

 हम अपने नगर के मंदिर में,
    पूजा गुणगान करें प्रभु का।
 देवालय शिवालय हनु मंदिर,
    हम सब का धर्म यही सबका।।

शुभ मंगल दिवस मंदिर जाकर,
      भक्ति कर राम मय हो जाएं।
 रात्रि में घर अपने-अपने,
      दीपोत्सव दीप से ज्योति जलाएं।। 

© कवि किशोरी लाल जैन बादल
          भिंड मध्य प्रदेश

Thursday, January 18, 2024

आ. रघुनाथ पालीवाल

ब्रह्मा जी के पुत्र दरीची, कश्यप के वंश से जो सूर्यवंश हुआ।उसी के इक्षवा कुल में प्रभू श्री राम का जन्म हुआ, विष्णु के अवतार माने प्रभू श्री राम का जन्म त्रेता युग में हुआ,,राजा दशरथ माता कौशल्या के पुत्र तो लखन भरत शत्रुघ्न के भाई ये प्रभू श्री राम।
माता सीता के आदर्श पति ये प्रभू श्री राम,हनुमान उनका परम भक्त है ,तो सुग्रीव उनका मित्र,। गुरु के साथ वन में जाते समय पत्थर की नारी अहल्लिया को मूल रूप धारण करते श्री राम।
ताड़क नामक स्थान पर ताड़का राक्षसी ओर राक्षसों का अंत किया प्रभू श्री राम ने। 
राजा जनक के वहा गुरु आज्ञा से स्वयंवर में शिव धनुष को तोड़ा जनक दुलारी से नाता जोड़ा,,।
समय बड़ा बलवान, काल विकट परिस्थितियों मे प्रभू श्री राम को 14 वर्ष का वनवास मिला ,पिता का वचन नही टूटे ,,रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाय।प्रभू श्री राम वन को चल पड़े वन में खर दूषण को मार डाला,तो सीता माता का अपहरण की घटना रावण ने रची , जटायु राज ने अपने आप को मौत के हवाले करते हुए सीता माता के लिए लड़ते हुए वीरगति प्राप्त हुआ। बाली के धमंड को चूर कर उनका वध किया,, वानर सेना लेकर राम सेतु का निर्माण नल नील ने किया तो सभी लंका पहुंच रावण मेघनाथ सहित पूरे राक्षसों का विनाश किया प्रभू श्री राम ने ,सीता सहित पुप्ष विमान वाहक से अपने धाम अयोध्या को आए। 
प्रभु श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए तो राम ने सत्य वचन करुणा धर्म सदाचार के मार्ग पर चल कर राज किया। 
प्रभु श्री राम एक आदर्श पति भी ये सीता जैसी एक पतिव्रता नारी होना आज ये युग में बहुत मुस्किल,,राम जैसा पति की कामना तो सभी करते हैं, परंतु इस बात पर विचार करे राम के लिए सीता माता बनना भी आवश्यक है,,,,,,,,
स्व रचित मौलिक
© रघुनाथ पालीवाल

Wednesday, January 17, 2024

आ प्रियंका प्रियदर्शिनी जी

सीताराम आएंगे
सदियों बाद वनवास खतम हुआ
सीता राम अब वापसआये हैं
खुश हुए सब प्राणी प्रभु के श्री चरण पखारेंगे
दीप ज्योति से जगमग हुआ जग सारा
भक्ति की बह रही है धारा
अवध के प्राण पधारें हैं
सीता राम अब वापस आये हैं ।
विरहा की अग्नि में जलती
कितनों की सांसे थम गई
कितनों ने आस की ज्योत जगाये
कितनों की वादें टूट गई
अब आई सुखद यह बेला
प्रभु के भक्त नहीं अकेला
गली गली राम की धुन गाने वाले आये हैं
सीता राम अब वापस आये हैं ।
राम के महल अब सज रही
भक्त के मंदिर अब बन रही
प्रभु के दर्शन होंगे अब अवध में
अलौकिक दृश्य मन भाये हैं
सीता राम अब वापस आये हैं ।
Bais जनवरी इतिहास रचेगी
प्राण प्रतिष्ठा का व्यवहार दिखेगी
प्रभु अवतरित होंगे धरा पर फिर से
तन पुलकित मन हर्षाये हैं
सीता राम अब वापस आये हैं।
🌸 प्रियंका प्रियदर्शिनी🌸
 राँची , झारखंड

आ. आभा गुप्ता

शीर्षक-सिया राम आगमन
सुंदर सकल जहान हुआ है,
सिया राम आगमन हुआ है,
ढोल-नगाड़े, गाजे-बाजे,
चहुंओर उत्साह मचा है,
जय घोंष के स्वर हैं प्रखरित,
जन मानस सब, उमड़ पड़ा है,
अठखेली करती हैं नदियाॅ,
प॔क्षी उन्मुक्त उड़ान उड़ा है,
प्रकृति सजी है उपवन जैसी,
आज धरा का मान बढ़ा है,
नगरी कोई न अयोध्या जैसी,
स्वर्ग अगर है तो वो यहाॅ है,
सिया राम सम नहीं कोई जोड़ी,
देख जगत हैरान हुआ है,
जनक सुता और दशरथ के सुत,
जैसा कोई अवतार कहाॅ है,
सिया राम हैं जगत अधारा,
भक्त का मन बस यहीं रमा है,
भले जगत बॅटा टुकड़ों मे,
सबके मालिक एक सदा हैं,
मेरे मर्यादा पुरुषोत्तम रघुवर,
मुझ जैसा कहाॅ भक्त हुआ है।
© आभा गुप्ता
इंदौर

आ. ओम सिन्हा जी

मेरे राम 

धरती राम आकाश राम पाताल राम , सब को राम राम 
तुझमे भी राम मुझमे भी राम , अब एक ही काम बोलो राम राम !!
ये हवा राम ये पानी राम, ये पक्षी राम ये पेड़ पौधे राम !
एक राम अनेक राम , सबको बोलो राम राम !!
वो खिलखिलाते राम , वो आज्ञाकारी राम !
अब तो एक ही काम , बोलो हल पल राम राम !!
वो विश्वामित्र के कवच राम , वो सर्व श्रेष्ठ क्षत्रिय राम !
वो स्वयम्बर विजेता राम , वो सीतामय राम !
वो आज्ञाकारी राम , वो वनवासी राम !
वो आदर्श भ्राता राम , वो निषादराज के सखा राम !
वो केवट के इंतजार के राम , वो गंगा को पवित्र करते राम !
वो बुराई को मिटाते राम , संसार को मर्यादा सीखाते राम !
वो सीता हरण की लीला रचते राम, वो अच्छाई और बुराई को समझाते राम !
वो हनुमान सा सेवक पाते राम , जो हर काज सवारे कहते राम !
वो शबरी के झूंठे बैर खाते राम , अहिल्या का उद्धार करते राम !! 
वो राक्षसों का विनाश करते राम, वो माँ सीता के साथ अयोध्या आते राम !
वो माता कैकयी और पिता दशरथ के वचनो को पूरा करते राम !!
वो अयोध्या फिर निहारती राम , बच्चा बच्चा करता राम !
हो गए तुझमे राम, मुझमे राम सबमे राम , सब बोलो राम राम !!

© कवि - ओम सिन्हा

आ. लोकेश कौशिक जी

राम आएंगे
**********************
राम आएंगे, अयोध्या जाएंगे
बाल रूप सहलायेंगे
बड़े होकर राजा कहलायेंगे
राम राज्य का सपना सबको समझाएंगे
प्रत्येक शबरी से मिलने जाएंगे
हनुमानगढ़ी वाले को साथ ले जाएंगे
तुलसी घाट पर नहाएंगे
मनुज रूप में चतुर्भुज रूप दिखाएंगे
अयोध्या के जन-जन को रिझाएंगे
बाबरी वालों को भी अपनाएंगे
और, फिर
सबको आशीर्वाद देकर बैकुंठ लौट जाएंगे
लेकिन
अपने बाल रूप को वहीं छोड़ जाएंगे
अपने भक्तों के लिए
22 जनवरी से पहले नहीं जाएंगे।

© लोकेश कौशिक
सहायक प्रोफेसर
स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडीज एंड टीचर एजुकेशन, झज्जर
हरियाणा।

आ. पवन शर्मा जी

राम भजन

सजी है अयोध्या दीप जगमगा रहे हैं,
मेरे राम आ रहे हैं, श्री राम आ रहे हैं।
भगवा लेके हाथों में खुशियां मना रहे हैं,
मेरे राम आ रहे हैं, श्री राम आ रहे हैं।

राम सिया राम हर तरफ है राम राम,
गगन झूमें धरती गाये आ रहे हैं राम।2
जीव जंतु पते फूल सब मुस्कुरा रहे हैं,
मेरे राम आ रहे हैं, श्री राम आ रहे हैं।

कश्मीर से कन्याकुमारी सब राममय है,
देखो शुभ घड़ी है आई सब आनंदमय है।2
हर जगह मची है धूम मस्ती में गा रहे हैं,
मेरे राम आ रहे हैं, श्री राम आ रहे हैं।

साधु संत भक्त सारे सब राह तक रहे हैं,
राम से मिलने को सभी बेचैन लग रहे हैं।2
कबसे खड़े है राहों में पुष्प बिछा रहे हैं,
मेरे राम आ रहे हैं, श्री राम आ रहे हैं।

         - गीतकार - ©पवन शर्मा,
            शिमला, हिमाचल प्रदेश

आ. आरती पाण्डेय जी

प्रभू चरित्र के वर्णन का,
 कैसे मैं गुणगान करूं।
सबसे पहले प्रभू आपके ,
श्री चरणों में प्रणाम करूं।
मां सरस्वती हमारी वाणी में ,
ऐसी मृदुलता दे जाना।
भावों में मेरी शुद्धता का,
 एक प्रमाण दे जाना।
बाइस जनवरी को अयोध्या में,
राम लला का राज्याभिषेक होने वाला है।
एक जनमानस का समूह ,
अयोध्या जाने वाला है।
मेरे प्यासे नैनों को भी,
सौभाग्य दर्शन के दे जाना।
हे राम आपके आगमन में,
हृदय को ही धाम बनाना है।
हर मन यहां मुक्त हो पापों से।
रावण राज्य समाप्त हो जाए।,
मेरे प्यारे भारतवर्ष में,
 एक ऐसा साम्राज्य हो जाए।
हर पुरुष में राम की झांकी हो।
हर स्त्री सीता सी संस्कारी हो।
पुरुषोत्तम राम की मर्यादा पर।
राजनीति ना यहां भारी हो।
कलयुग को समाप्त कर हमें।
त्रेतायुग को लाना है।
प्रभू आपके आगमन में,
हमें धरा को धाम बनाना है।
प्रभू के काम आ जाना है।
यह जीवन है बेकार यहां ।
आज इसे साकार बनाना है ।
       © आरती पांडेय ✍️

आ. अवध नारायण यादव जी

नमन मंच🙏
सीताराम काव्य स्पर्धा
विषय ---- राम सीता
विधा ---- कविता (मुक्तक)
दिनांक ----17/01/2024

चैत माह की दुपहरी, और नवमी तिथि थी खास।
बालक की किलकारियों से, चहक उठा रनिवास।
मर्यादा पुरुषोत्तम बनकर जगतपिता अवतार लिए,
अवध नरेश दशरथ के मन की, हो गई पूरी आस।

हर रूप में मर्यादा पालन, राम ने आजीवन किया।
पुत्र, शिष्य, भाई रूप में, सदा आदर्श जीवन जिया।
शबरी गीध अहिल्या तारे बनकर प्रभु जी उपकारी,
कैकेई की आज्ञा मान, बिन सोचे वन सिधार लिया।

पहुँचे सुरसरि के तट पर , प्रेम से केवट ने पग धोये।
वन में सीता का हरण हुआ, मानव की भाँति वे रोये।
बालि का वधकर सुग्रीव को कृष्कृन्धा का राज दिए,
मित्रता का धर्म निभाकर, वे बीज आदर्श का बोये।

शरणागत विभीषण को, निज शरण में मान दिया है।
वध करके दशकंधर का, लंका का कमान दिया है।
खुशी से अयोध्या आये सीता सहित सिंहासन पाये,
करके त्याग जानकी का, एक राजा का काम किया है।

© अवध नारायण यादव
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
स्वरचित/मौलिक✍️

आ. सोनाली ठाकुर जी

दशहरा के पर्व पर जलते हुए, रावण के पुतले ‌द्वारा 
         मनुष्य से किए गए कुछ प्रश्न
********************************************
मुझ पर बाण चलाने वाले, मुझ को यूँ जलाने वाले ,
झाँक कर देखो अपने अंतर्मन में, क्या तुम राम हो? 
राम-से भगवान हो या राम-से इंसान हो, 
झाँक कर देखो अपने अंतर्मन में क्या तुम राम ही हो?

हो शील भावना राम-सी, राम-सा ही त्याग हो,  
धैर्य हो राम सा, राम सा बलिदान हो ,
मर्यादित हो राम से, सहज सरल स्वभाव हो,
झाँक कर देखो अपने अंतर्मन में क्या तुम राम हो? 

वचनबद्ध हुए पितृ वचन से, माँ की आज्ञा ऐसी मानी, 
राज महल का त्याग कर सब सुख,वन को जाने की है ठानी ,
धर लिया साधु का वेश, प्रभु बन गए सन्यासी ,
कल बनने वाले थे अवध के राजा, 
राम, देखो आज बन गए वनवासी ,
तो कहो, मां-बाप को वृद्‌धाश्रम का रास्ता दिखाने वाले,
माँ का मान, पिता का अभिमान क्या तुम हो ?
झाँक कर देखो अपने अंतर्मन में क्या तुम राम हो ?

दुर्गम था वन का पथ, वनवासी का जीवन आसान कहाँ?
 मंद मुस्कान मुख पर शोभित, चेहरे पर शिकन की रेखा कहाँ?
तो कहो, हर संकट से घबराने वाले मुश्किलों से सकुचाने वाले ,
क्या तुम स्वयं अपनी विपदा का समाधान हो ?
झाँक कर देखो अपने अंतर्मन में क्या तुम राम हो ?

मित्रता के रिश्ते को ऐसे निभाया,
सुग्रीव को दिया राज पाट, राजा निषाद को गले लगाया,
देखो, जाति विभेद को कितने प्रेम से मिटाया ,
शबरी के झूठे बेरों को, बड़े चाव से है खाया ,
तो बात-बात पर जात-पात का ढोंग रचाने वाले ,
 तुम किस मानसिकता के गुलाम हो ?
झाँक कर देखो अपने अंतर्मन में क्या तुम राम हो ? 

जीवन के हर दृष्टांत में, नारी का सम्मान किया,
तारा अहिल्या को स्पर्श मात्र से, शबरी को भी मान दिया,
बात थी, एक स्त्री के स्वाभिमान की, 
पूरे लंका कुल का संहार किया ,
कैकई की इक इच्छा पर, चौदह वर्ष वन विहार किया,
तो कहो, नारी की पीड़ा देख, मौन धरने वालो, 
तुम कैसे इंसान हो ?
झाँक कर देखो अपने अंतर्मन में क्या तुम राम हो?

कर्मों को रखा सर्वोपरि, मर्यादा में हर काम किया,
हे राम जगत के दुखहर्ता, स्वयं संघर्षों को अपने नाम किया,
विपदा थी भी कोई, सहजता से स्वीकार किया, 
स्वयं सह कष्ट सारे, जन जीवन का उद्‌धार किया,
तो कहो, संघर्षपूर्ण इस जीवन में धर्म अविराम हो ,
झाँक कर देखो अपने अंतर्मन में क्या तुम राम हो ?

धर्म-कर्म कर्तव्यों का ज्ञान हमें सिखाया है,
मर्यादा में रह मर्यादा का पाठ हमें पढ़ाया है। 
मातृ -पितृ की भक्ति हो, वहीं निश्चल राष्ट्रप्रेम हो ,
ऐसे कर्तव्य सिखाने, भगवान इंसान बन आएँ हैं ।
राम नाम अलौकिक है, कभी ना बुझने वाली मशाल है ।
होंगे भगवन सनातन के, राम हर मजहब के लिए मिसाल है ।।

तो कहो ! राम के गुणों का तुम कौन-सा भाग हो?
झाँक कर देखो अपने अंतर्मन में क्या तुम राम हो ? 
कहो ! राम के गुणों का तुम कौन-सा भाग हो ?
झाँक कर देखो अपने अंतर्मन में क्या तुम राम हो?

© सोनाली ठाकुर

आ. सुनील कुमार महला जी

राम कौन है ?
भारतीय संस्कृति के आधार हैं राम।
भगवान विष्णु के अवतार हैं राम।
महाराज दशरथ और रानी कौशल्या के सबसे बड़े पुत्र हैं राम।
सीता के पति व लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्न के भ्राता
हैं राम।
जटायु के उद्धारक हैं राम।
वचनों के प्रति प्रतिबद्ध हैं राम।
भीतर प्रकाश है राम, हृदय में प्रकाश है राम।
इंसानियत का आधार और बुनियाद है राम।
ब्रह्मांड में, इस जीव-जगत में रमा हुआ तत्व है राम।
चराचर में विराजमान स्वयं ब्रह्म हैं राम।
मर्यादा पुरुषोत्तम है राम।
करूणा है राम, शांति है राम।
राम हर आंगन में है।
सबके मन और आत्मा में है राम।
योगियों की आध्यात्मिक-मानसिक भूख और
भोजन हैं राम।
कैवल्य है राम, कल्याण है राम।
ज्योतित सत्ता है राम।
पतवार है राम, पालनहार है राम।
अहिल्या के उद्धारक हैं राम।
माता शबरी(श्रमता) के झूठे बेरों को प्रेम से
खाने वाले हैं राम।
तुलसी के हैं राम, वाल्मीकि के हैं राम।
अगस्त ऋषि के परम शिष्य हैं राम।
गांधी, कबीर के हैं राम।
अध्यात्मिकता का मार्ग है राम ।
दृष्टिकोण है राम ।
श्री हनुमान का विश्वास है राम ।
ज्योतिपुंज है राम।
स्वयं में एक दर्शन हैं राम।
आत्मा,मन, शरीर और प्राणशक्ति है राम।
आनंद और प्रसन्नता के स्त्रोत हैं राम।
राम वह सत्ता है,
जिसकी शक्ति से रावण मर जाता है।
****************************************
© सुनील कुमार महला,
फ्रीलांस राइटर, कालमिस्ट व युवा साहित्यकार, 
उत्तराखंड।

आ. डॉ. जय महलवाल जी

राम नाम की धूम
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राम नाम की धूम मची है गली गली,
हर भारतवासी प्रसन्न हो उठा है,
चारों तरफ फूल खिले हैं, 
महक उठी है कली कली।
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प्राण प्रतिष्ठा श्री राम की करेंगे,
पीले चावल लेकर चले अयोध्या नगरी,
 भक्त हर कोने कोने से भारत के,
टोली टोली भक्तों से भरी पड़ी है अयोध्या की गली गली।
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भव्य मंदिर का निर्माण हुआ है,
गर्व कर रहा है जिस पर हर हिंदोस्तानी,
सिर ऊंचा हो उठा है विश्व में,
राम नाम की है ऐसी धूम मची।
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जहां भी देखो आजकल ,
राम नाम की ही है बात चली,
मेरे राम बिराजेंगे अयोध्या,
राम नाम की है ऐसी धूम मची।
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चांद की रोशनी भी फीकी पड़ जायेगी,
देख अयोध्या ऐसे है सजी,
प्रभु श्री राम के दर्शन होंगे वहां,
राम नाम की है ऐसी धूम मची।
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बाईस जनवरी को आ रही वो शुभ घड़ी,
प्राण प्रतिष्ठा होगी प्रभु की,
पूरा विश्व देखेगा भारत की भक्ति,
राम नाम की है ऐसी धूम मची।
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आओ मिलजुल कर करें प्रयास,
अपने प्रभु की लीला है बड़ी,
बना दे बाईस जनवरी को ऐतिहासिक,
राम नाम की है ऐसी धूम मची।
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स्वरचित एवम मौलिक रचना
© डॉक्टर जय महलवाल
बिलासपुर हिमाचल प्रदेश

आ. अमित पाठक शाकद्वीपी

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