कहीं खुशियां कही गम दे जाते है।
आज वो अयोध्या को रैन बसैरा बना रहें है,
कुछ पल विश्राम करे, रुकें पल भर वो
अयोध्या को आराम गृह बना रहें है।
कण कण में उनकी आत्मा का वास है,
इसलिए अयोध्या उनकी निवास स्थान है।
जन्मों जन्मों की आज खुशी आई,
दशरथ संग जन–जन की आंख भर आई।
चारो तरफ धरा–अंबर में रज रज मुस्कुराया।।
राम संग चारों भाई अयोध्या में आएं,
कैकयी, सुमित्रा ,कौशल्या की गोद में,
युग–युगांतर की खुशियां लाएं,
समय करवट लेता रहता है,
अपना रंग बदलता रहता है,
राजा हो या रंक उनके कर्मों का लेखा–जोखा,
जन्म से मरण तक चलता रहता,
भगवान को भी वन गमन करना पड़ा,
कितनो के जीवन को निवार्ण दिया,
पग–पग पर पीड़ा बाधाये हंसकर सीने से लगाएं,
जन-जन को मानवता का पाठ पढ़ाया,
इस कलयुग में फिर धरा पर आ रहे हैं।
कन– कन को हर्षित करके जीवन में खुशी ला रहे हैं।।
अंत भला सब भला होगा, मेरे राम आ रहे हैं,
उम्मीद का दीया फिर जल उठा है,
राम नाम की जप माला घर-घर गूंज रही,
केवल प्राज प्रतिष्ठा तक राम के आदर्शो का गमन होगा,
मानव के अंदर जागृत राक्षस का नाश होगा,
यही प्रशन विचलित कर जाता है,
अंत: में कुछ देर यही सोचता हर पल,
सब आज तक ही सीमित है जहां मे,
कल से तो राम भी अनभिज्ञ थे,
इसलिए रामराज्य को पल भर में त्यागा,
यह तो कलयुग की माया है,
इसलिए हर मुख पर राम और अंदर काली छाया है।
लेकिन जो लेते उसी पल राम नाम का,
वो इस भव सागर से तर जाता है।
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