Saturday, February 3, 2024

आ. अमित पाठक शाकद्वीपी

अभिनंदन हे अवध बिहारी
अभिनंदन हे अवध बिहारी, मेघवर्ण पीतांबर धारी,
स्वर्ण मुकुट मुक्तन की माला, दीप्त भाल है नयन विशाला,
पद पंकज की शोभा ऐसी, है जन-जन के ये हितकारी,
                   अभिनंदन हे अवध बिहारी ।।१।।

नारायण तुम नर तन धारे, भारत भू के भाग्य संवारे,
धन्य अवधपुरी धाम मनोहर, कर्मठ मन पर धर्म की मोहर,
सत्य सनातन सिद्ध हुआ है, भक्त वत्सल संतन सुखकारी,
                   अभिनंदन हे अवध बिहारी ।।२।।

मात पिता गुरु की आज्ञा से वन को चले जब रघुराई,
दुष्टों का संहार किया तब अतृप्त जनों को तृप्ति दिलाई, 
मोह के बंधन में है यह मन कब यह मोह मिटे धनुर्धारी,
                   अभिनंदन हे अवध बिहारी ।।३।।

राजतिलक को रथ चढ़ आओ संग में रहे मां जानकी प्यारी,
चारों भाई संग हनुमत लाला दरबार की देखो शोभा न्यारी,
केसर तिलक पुष्पों की माला हाथ कोदंड महाशुभकारी,
                    अभिनंदन हे अवध बिहारी ।।४।।

दृश्य मनभावन, पुनीत पावन, हर्षित कण कण, पुल्कित आंगन,
दसो दिशाएं झूम उठी है काशी मथुरा और वृंदावन,
दर्श दिखाकर विपदा हर लो मंगल भवन अमंगल हारी,
                    अभिनंदन हे अवध बिहारी ।।५।।
       रामाय रामचंद्राय रामभद्राय में नमः 
    रघुवंशनाथ नाथाय श्री सीतापतये नमः।।

© अमित पाठक शाकद्वीपी 

Friday, February 2, 2024

आ. कमल तिवारी

अब राम अवध में आयेंगे।।
घर वापस, अपने आयेंगे,
सब खुशियाँ खूब मनाएँगे। 
घर-घर मंगलाचरण होगे,
प्रभु सिंहासन फिर पायेंगे। 
हम वंदनबार सजायेंगे,
अब राम अवध में आयेंगे।।

शबरी की कुटिया जाएंगे,
केवट को गले लगायेंगे।
सब हिन्दू अपने भाई है। 
बिछुड़ो को गले लगायेगा,
 हक अपना निज सब पायेंगे। 
अब राम अवध में आयेंगे।।

जन-जन पर कलियुग का प्रभाव,
जग से गायब जो सद्‌भाव।
दुश्मनों ने जो देश फैलाया,
ऊंच नीच के भेद भाव।
 हम मिलकर सभी मिटा‌येंगे,
 सबको गले लगायेंगे ।
अब राम अवध के आयेंगे।।

सबको जातियों में फोड़ा था,
यवनों ने मन्दिर तोड़ा था।
मस्जिद का शिखर बनाया था,
हिन्दू जम-जम तब रोया था।
अब बहकावे में ना आएंगे,
घंटा घड़ियाल बजाएंगे।
अब राम अवध के आयेंगे।।

दीपक हम सभी जलाएंगे,
मिलकर दिवाली मनाएंगे।
सबका सपना साकार हुआ,
घर अपना खूब सजाएंगे।
हिंदू गौरव लौट आएंगे,
अब राम अवध के आयेंगे।।

प्रभु दुष्ट दशानन मारेंगे,
मंदिर में राम विराजेंगे।
वह मुक्त समाज बनेगा,
भक्तों को अपने तारेंगे।
हम रामराज फिर लायेंगे,
सब गीत खुशी के गायेंगे।
अब राम अवध के आयेंगे।।

Thursday, February 1, 2024

आ. ज्योति रानी

आएं जग तारणहार

आएं जग तारणहार 
अयोध्या सजी है लगाओ बंदनवार,
बरसो पलके बिछाए किया है इंतजार,
राम दर्शन को तरस उठा सारा संसार,
चलो अयोध्या चले आए जग तारणहार।।
सभी राम भक्तों ने लाखों प्रयास किए हैं,
कुछ राम प्यारो ने अपने प्राण भी तज दिए हैं,
सबके प्रयासों से ही रच गया एक नया इतिहास,
रामलला अयोध्या विराजे पांच सौ वर्षों का काट वनवास।।
विरोधियों को परास्त कर कोर्ट से जब आदेश आए,
सभी धर्म प्रेमी भी अपने मन में बहुत हर्षाएं,
बच्चे बच्चे के मानस पटल पर राम छा गए,
अयोध्या पुनः हुई पावन मेरे श्री राम आ गए।।
मोदी जी ने भी श्रद्धा भाव से विधि विधान सभी किया,
भक्तो ने भी अयोध्या के पुनः निर्माण में योगदान पूरा दिया,
घर-घर पुनः राम दिवाली मनाओ बनाओ मीठे पकवान, 
पालनहार अयोध्या विराजे आए जग तारणहार।।

मौलिक एवं अप्रकाशित रचना 
© श्रीमती ज्योति रानी
 धामपुर बिजनौर उत्तर प्रदेश 
भारत

आ. अमित पाठक शाकद्वीपी

अभिनंदन हे अवध बिहारी अभिनंदन हे अवध बिहारी, मेघवर्ण पीतांबर धारी, स्वर्ण मुकुट मुक्तन की माला, दीप्त भाल है नयन विशाला, पद पंकज...