Monday, January 29, 2024

आ. कुंवर अर्जुन सिंह


कौशल्या की आंख के तारे,
दशरथ जी के आप दुलारे।
डूबती नया करो किनारे, 
हे रघुनंदन राम हमारे।।

दशरथ जी के आंगन आए।
राम प्रजा के मन में समाए।।
मोहनी सूरत देख राम की,
दशरथ मन ही मनहर्षाए।।
जीवन नया तेरे सहारे,
                 हे रघुनंदन राम हमारे।।//2//1//

मात पिता का वचन निभाया।
त्याग महल वन को अपनाया।।
घास फूस का पंचवटी में,
राम ने सुंदर महल बनाया।।
                हे रघुनंदन राम हमारे।।//2//2//

निशाद राज को गले लगाया।
जातिवाद का भेद मिटाया।।
ना कोई ऊंचा, ना कोई नीचा,
प्रभु ने हमको ये समझाया।।
                ऐसे है प्रभु राम हमारे //2//3//

© कुंवर अर्जुन सिंह 

No comments:

Post a Comment

आ. अमित पाठक शाकद्वीपी

अभिनंदन हे अवध बिहारी अभिनंदन हे अवध बिहारी, मेघवर्ण पीतांबर धारी, स्वर्ण मुकुट मुक्तन की माला, दीप्त भाल है नयन विशाला, पद पंकज...