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बाईस जनवरी साल ,
दो हजार चोवीस को,
सब देश-वासियों नें,
मंगल गीत गाए हैं।
अवध में राम आए हैं।।
खत्म हुई सदियों की प्रतीक्षा,
हम सब ने घर-द्वार सजाए हैं।
चौदह बरस वन में बिताए हैं,
सांथ माता-सिता को लाए हैं।
पहली दिवाली मनाई थी,
लंका पर विजय पाने की।।
आज दिवाली मना रहे सब,
रामजी के अयोध्या आनें की।
आज सबने शुभ दीप जलाए हैं।
अवध में राम आए हैं।।
आह्वान मेरा है देशकी तरुणांई से
पथ विचलित मत हो जानां ,
तुम कहीं झूंठी वाह-वाही से।
राम जन्मभूमि इतिहास ,
लिखा कार सेवकों नें,
अपनें लहू की स्याही से।।
पूरे देश से चुन-चुन कर ईंट,
पत्थर और सिलाऐं लाए हैं।
अवध में राम आए हैं।।
शहिदों नें देखा था यहां ,
श्री राम जी के लिए सपनां।।
एक दिन जरूर बनेगा यहां,
भव्य श्री राम मंदिर अपनां।।
देश के युवाओं नें शपथ उठाई
सब ने सौगंध राम की खाई।।
मंदिर वहीं बनाएं हैं,
अवध में राम आए हैं।।
सनांतनियोंकी हुई पूरी इच्छा,
खत्म हुई शादियोंकी प्रतीक्षा।
पूरे विश्व में बजनें लगा है,
प्रभु श्री राम जी का डंका।
ऐसा लगनें लगा है जैसे,
जीत कर आए हो लंका।
घर-घर बंटी बधाई सब नें,
खुशियों संग मंगल गाएं हैं।
अवध में राम आए हैं।।
जग-मग उठे धरती आकाश,
होने लगा स्वर्ग सा एहसास।
मिलकर सब नर-नारियों नें,
मंदिर वंदन-वार सजाएं हैं।
बाईस जनवरी साल दो,
हजार चोवीस को घर-द्वार ,
मंदिर-मंदिर दीप जलाए हैं ,
अवध में राम आए हैं।।
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© आशु कवि-"शिक्षक"लायन' के.पी.एस.चौहान"आरजू "लायन"फोटोग्राफर-
सब-रस कवि
मालवी एवं हिंदी हास्य
व्यंग लेखक साहित्यकार
गुरान सांवेर इंदौर(म.प्र.)
मों नं.-98260 31513
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