Friday, February 2, 2024

आ. कमल तिवारी

अब राम अवध में आयेंगे।।
घर वापस, अपने आयेंगे,
सब खुशियाँ खूब मनाएँगे। 
घर-घर मंगलाचरण होगे,
प्रभु सिंहासन फिर पायेंगे। 
हम वंदनबार सजायेंगे,
अब राम अवध में आयेंगे।।

शबरी की कुटिया जाएंगे,
केवट को गले लगायेंगे।
सब हिन्दू अपने भाई है। 
बिछुड़ो को गले लगायेगा,
 हक अपना निज सब पायेंगे। 
अब राम अवध में आयेंगे।।

जन-जन पर कलियुग का प्रभाव,
जग से गायब जो सद्‌भाव।
दुश्मनों ने जो देश फैलाया,
ऊंच नीच के भेद भाव।
 हम मिलकर सभी मिटा‌येंगे,
 सबको गले लगायेंगे ।
अब राम अवध के आयेंगे।।

सबको जातियों में फोड़ा था,
यवनों ने मन्दिर तोड़ा था।
मस्जिद का शिखर बनाया था,
हिन्दू जम-जम तब रोया था।
अब बहकावे में ना आएंगे,
घंटा घड़ियाल बजाएंगे।
अब राम अवध के आयेंगे।।

दीपक हम सभी जलाएंगे,
मिलकर दिवाली मनाएंगे।
सबका सपना साकार हुआ,
घर अपना खूब सजाएंगे।
हिंदू गौरव लौट आएंगे,
अब राम अवध के आयेंगे।।

प्रभु दुष्ट दशानन मारेंगे,
मंदिर में राम विराजेंगे।
वह मुक्त समाज बनेगा,
भक्तों को अपने तारेंगे।
हम रामराज फिर लायेंगे,
सब गीत खुशी के गायेंगे।
अब राम अवध के आयेंगे।।

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