Saturday, January 20, 2024

आ. कमल पटेल जी

जागे-जागे हमारे भाग
(धुन-जाने कितने दिनों के बाद गीत के तर्ज पर)

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जागे-जागे हमारे देखो भाग !
                अवध में राम आएं हैं...
जागे-जागे रे देखो मेरे भाग।
                अवध में राम आएं हैं...
जाने कितने दिनों के बाद,
                अवध में राम आएं हैं...
                 महल में राम आएं हैं…
                 भवन में राम आएं हैं...
जागे-जागे...

राम लला के दर्शन पाऊं,
जीवन को में धन्य बनाऊं।..... ×2
आई घड़ी वो बरसों बाद,
आई घड़ी वो बरसो बाद।
               अवध में राम आएं हैं...
                महल में राम आएं हैं...
                भवन में राम आएं हैं...
जागे-जागे...

अवध में काली रात थी छाई,
          बीत गई वो घड़ी दुखदाई। ×2
 आई फिर से नई प्रभात,
 आई फिर से नई प्रभात।
                अवध में राम आएं हैं...
                महल में राम आएं हैं…
                भवन में राम आएं हैं...
जागे-जागे...

घर-घर दीप की ज्योति जलाएं,
            वंदनवार से घर को सजाएं। ×2
चलो मनाएं दिवाली आज,
चलो मनाएं दिवाली आज।
                  अवध में राम आएं हैं...
                  महल में राम आएं हैं...
                  भवन में राम आएं हैं...
जागे-जागे हमारे देखो भाग,
                 अवध में राम आएं हैं...
स्वरचित-
© *कमल पटेल* , ग्राम : चकरावदा

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