Wednesday, January 17, 2024

आ. ओम सिन्हा जी

मेरे राम 

धरती राम आकाश राम पाताल राम , सब को राम राम 
तुझमे भी राम मुझमे भी राम , अब एक ही काम बोलो राम राम !!
ये हवा राम ये पानी राम, ये पक्षी राम ये पेड़ पौधे राम !
एक राम अनेक राम , सबको बोलो राम राम !!
वो खिलखिलाते राम , वो आज्ञाकारी राम !
अब तो एक ही काम , बोलो हल पल राम राम !!
वो विश्वामित्र के कवच राम , वो सर्व श्रेष्ठ क्षत्रिय राम !
वो स्वयम्बर विजेता राम , वो सीतामय राम !
वो आज्ञाकारी राम , वो वनवासी राम !
वो आदर्श भ्राता राम , वो निषादराज के सखा राम !
वो केवट के इंतजार के राम , वो गंगा को पवित्र करते राम !
वो बुराई को मिटाते राम , संसार को मर्यादा सीखाते राम !
वो सीता हरण की लीला रचते राम, वो अच्छाई और बुराई को समझाते राम !
वो हनुमान सा सेवक पाते राम , जो हर काज सवारे कहते राम !
वो शबरी के झूंठे बैर खाते राम , अहिल्या का उद्धार करते राम !! 
वो राक्षसों का विनाश करते राम, वो माँ सीता के साथ अयोध्या आते राम !
वो माता कैकयी और पिता दशरथ के वचनो को पूरा करते राम !!
वो अयोध्या फिर निहारती राम , बच्चा बच्चा करता राम !
हो गए तुझमे राम, मुझमे राम सबमे राम , सब बोलो राम राम !!

© कवि - ओम सिन्हा

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