शीर्षक-सिया राम आगमन
सुंदर सकल जहान हुआ है,
सिया राम आगमन हुआ है,
ढोल-नगाड़े, गाजे-बाजे,
चहुंओर उत्साह मचा है,
जय घोंष के स्वर हैं प्रखरित,
जन मानस सब, उमड़ पड़ा है,
अठखेली करती हैं नदियाॅ,
प॔क्षी उन्मुक्त उड़ान उड़ा है,
प्रकृति सजी है उपवन जैसी,
आज धरा का मान बढ़ा है,
नगरी कोई न अयोध्या जैसी,
स्वर्ग अगर है तो वो यहाॅ है,
सिया राम सम नहीं कोई जोड़ी,
देख जगत हैरान हुआ है,
जनक सुता और दशरथ के सुत,
जैसा कोई अवतार कहाॅ है,
सिया राम हैं जगत अधारा,
भक्त का मन बस यहीं रमा है,
भले जगत बॅटा टुकड़ों मे,
सबके मालिक एक सदा हैं,
मेरे मर्यादा पुरुषोत्तम रघुवर,
मुझ जैसा कहाॅ भक्त हुआ है।
© आभा गुप्ता
इंदौर
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