राम आएंगे तो क्या होगा
शुष्क धरा नम हो जाएगी
जीवन के नए फूल खिलेंगे,
जो शीतल वर्ण के होंगे
जो स्वतंत्र निडर होकर रहेंगे।
हीन भावना की जड़ें
शुष्क हो बिखर जाएगी,
वो निष्क्रिय हो इस धरा पे
कहीं खो जाएगी।
इस नभ के सभी नभचर में
अस्तित्व में कभी भेद न होगा,
असमान भी समान हो जाएंगे
जब हृदय में कोई खेद न होगा।
पर यह होगा तो तब ही
जब प्यास बुझा लोगे एक जल से,
प्रेम ,सम्मान ,शांति का विस्तार होगा
इस नवीन प्रवीण पहल से।
© बिंदेश कुमार झा
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