अब श्रृंगारित है पुष्पों से,
अलंकृत हुए हैं बंधनवार।
सजे रंगबिरंगी रंगोली
संग चमकते दीपो की कतार।।
हुआ सु सज्जित स्वर्ग सा,
श्रीअयोध्या में राम दरबार।
गुंजित है लंबे वनवास के बाद,
अब लौटे हैं मेरे सरकार।।
हुआ शंखनाद श्रीराम नाम का,
अब है मंगलमय त्यौहार।
चहुंओर श्रीराम से ही सुख समृद्धि,
है धन धान्य की बहार।।
फलीभूत है पिता पुत्र सा प्यार,
हुआ भक्तो का सपना साकार।
श्रीअयोध्या में राममंदिर ने,
लंबी प्रतिक्षा बाद लिया आकार।।
यह जन्म सफल हमारा,
प्राप्त हुआ अक्षत निमंत्रण उपहार।
हम सौभाग्य से इस वर्ष मनायें,
दीपो की दिवाली दो बार।।
हम सबके राम है सबमें राम,,
है राम नाम ही जीवनाधार।
अनुभूत है हर क्षण हर पल,
मेरे राम की महिमा अपरम्पार।।
देखो शीत नहीं यह रामलहर की धूम मची है सबके गृह द्वार।
मानो निर्जीव जग में आए प्राण, राममय हुआ संपूर्ण संसार।।
No comments:
Post a Comment