Wednesday, January 31, 2024

आ. कीर्ति देवानी

मेरे राम।।
राम राम राम
दो अक्षर का प्यारा नाम
राम राम राम राम।।

जीवन का आधार
राम राम
साचा है ये नाम,
राम राम।

तुझ में भी राम।
मुझ मे भी राम।
सब के दिल मे,
बसे हैं राम राम।

धरती भी राम।
अंबर भी राम ।
सृष्टि के हर,
कण कण में हैं राम राम।

आरम्भ भी राम।
अंत भी राम नाम।
बिन राम नाम,
सब हैं पूर्ण विराम।

जब राम नाम
संग हैं।
फिर किस बात
का डर हैं ।

काल भी करे
जिसको प्रणाम।
ऐसा हैं राम नाम
राम नाम राम राम।

पति पावन।
मोक्ष दायन।
भज मन प्यारे
राम राम राम।

कीर्ति की कलम ✍🏻
कीर्ति देवानी
नागपुर महाराष्ट्र

No comments:

Post a Comment

आ. अमित पाठक शाकद्वीपी

अभिनंदन हे अवध बिहारी अभिनंदन हे अवध बिहारी, मेघवर्ण पीतांबर धारी, स्वर्ण मुकुट मुक्तन की माला, दीप्त भाल है नयन विशाला, पद पंकज...