Wednesday, January 31, 2024

आ. प्रमिला सैनी जी


मन - दर्पण में राम
तुझ में राम,मुझमे राम,
संसार के कण - कण में राम।

नभ में राम, जग में राम,
जीवन के हर क्षण - क्षण में राम।

पशु में राम,पक्षी में राम,
प्रकृति के तृण-तृण में राम।

पुरुष में राम ,नारी में राम,
संघर्षों के रण क्षेत्र में राम।

रिश्तो के कारण में राम,
भावनाओं की वीणा में राम।

भार्या के प्रणय निवेदन में राम,
प्रेयसी के मुख अरुण में राम।

इन श्वासों की हिरण सी दौड़ में राम,
दिल की धड़कन के खण्ड- खण्ड में राम।

उत्तर में राम,दक्षिण में राम,
हमारे हर उद्देश्य को पूर्ण करते राम।

कर्मो के हर दण्ड में राम,
जीवो के भरण पोषण में राम।

जीवन के कारण में राम,
हमारे हर कल्याण में राम।

सूरज की किरण में राम,
जन जन के हर गण में राम।

क्षणभंगुर इस जीवन मे राम,
करते प्रणाम हम तुमको राम।

कण - कण में राम ,क्षण - क्षण में राम,
मेरे मन दर्पण में राम,
करती तन मन तुमको अर्पण राम।

आपकी अपनी हंसती मुस्कुराती सखी

© प्रमिला सैनी

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