Sunday, January 21, 2024

आ. संजना विश्वकर्मा

मधुर बेला सजी आज मेरे सिया राम आये हैं।
बड़े दिन बाद दिन आया हैं,
मेरे प्रभु राम आये हैं।
स्वर्ण सिंघासन कनक भवन में,
संग सिया के बैठेंगे,
ये तो बड़ा स्वप्न था जिसको,
पूर्ण होते हम देखेंगे.
राम नाम की रट्ट ये लगी हैं,
 कितनी सुन्दर प्यारी छवि हैं,
ये अदभुत क्षण में देखूँ,
मेरे सरकार आये हैं,
कड़ी तपस्या राम भक्तो की,
अब तो अनेको वरदान आये हैं।
ढ़ोल बजेंगे, साजेगी अवध नगरी,
सबके मन में बसें हैं राम,
मुख में राम नाम आये हैं।
हिन्दू राष्ट्र में हिन्दुओ के दाता,
निवास कर रहे थे बिन छत के,
देश उन्ही का, नाम उन्ही का,
 फुर भी वंचित थे वो घर से,
 आज हिन्दुओ के ये सपने पुरे होने आये हैं,
ये सम्मान हैं मेरा ये अभिमान हैं मेरा,
मेरे प्रभु राम आये हैं, मेरे श्री राम आये हैं।

🙏🏻🙏🏻🚩🚩🌹🌹
© संजना विश्वकर्मा
भोपाल मध्यप्रदेश

No comments:

Post a Comment

आ. अमित पाठक शाकद्वीपी

अभिनंदन हे अवध बिहारी अभिनंदन हे अवध बिहारी, मेघवर्ण पीतांबर धारी, स्वर्ण मुकुट मुक्तन की माला, दीप्त भाल है नयन विशाला, पद पंकज...