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कमलनयन छवि निराला,
श्याम वर्ण सुंदर मुख वाला।
नीलकमल है उपमा सोहै,
राम लला है सबसे प्यारा ।
राम नाम है सुख बरसावे,
सुन सुन हृदय ,मुख भी गावे।
सर्व पाप दुःख व्याधि मिट जावे,
रघुनंदन जब मन बस जावे ।
पधारो पुनः हे रघुराई ,
मर्यादित होय जन- जन।
राम युग है फिर आई,
धर्म पथ बिछा दो रघुराई।
ज्योत ज्ञान का जला,
दिवाली फिर सब ने मनाई।
हर घर दीप फिर जल जाए,
हर कंठ राम धुन को गाए।
भगवा हो गया अवधपुरी हमारा,
छू ले आसमान ध्वजा विशाला।
करुं आप से हम सब विनती रघुराई।
पधारो पुनः संग सिया आप क्षण है
आई।
जय श्री राम बोल रहा है भक्त विशाला,
अंजनी पुत्र को सौ बार नमन हमारा।
सज जाए पुनः राम दरबार हमारे,
राम नाम से गुंजे धरती संग आसमान सारा।।
©प्रिया प्रसाद ✍️
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