नमन मंच🙏
सीताराम काव्य स्पर्धा
विषय ---- राम सीता
विधा ---- कविता (मुक्तक)
दिनांक ----17/01/2024
चैत माह की दुपहरी, और नवमी तिथि थी खास।
बालक की किलकारियों से, चहक उठा रनिवास।
मर्यादा पुरुषोत्तम बनकर जगतपिता अवतार लिए,
अवध नरेश दशरथ के मन की, हो गई पूरी आस।
हर रूप में मर्यादा पालन, राम ने आजीवन किया।
पुत्र, शिष्य, भाई रूप में, सदा आदर्श जीवन जिया।
शबरी गीध अहिल्या तारे बनकर प्रभु जी उपकारी,
कैकेई की आज्ञा मान, बिन सोचे वन सिधार लिया।
पहुँचे सुरसरि के तट पर , प्रेम से केवट ने पग धोये।
वन में सीता का हरण हुआ, मानव की भाँति वे रोये।
बालि का वधकर सुग्रीव को कृष्कृन्धा का राज दिए,
मित्रता का धर्म निभाकर, वे बीज आदर्श का बोये।
शरणागत विभीषण को, निज शरण में मान दिया है।
वध करके दशकंधर का, लंका का कमान दिया है।
खुशी से अयोध्या आये सीता सहित सिंहासन पाये,
करके त्याग जानकी का, एक राजा का काम किया है।
© अवध नारायण यादव
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
स्वरचित/मौलिक✍️
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