Wednesday, January 17, 2024

आ. सोनाली ठाकुर जी

दशहरा के पर्व पर जलते हुए, रावण के पुतले ‌द्वारा 
         मनुष्य से किए गए कुछ प्रश्न
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मुझ पर बाण चलाने वाले, मुझ को यूँ जलाने वाले ,
झाँक कर देखो अपने अंतर्मन में, क्या तुम राम हो? 
राम-से भगवान हो या राम-से इंसान हो, 
झाँक कर देखो अपने अंतर्मन में क्या तुम राम ही हो?

हो शील भावना राम-सी, राम-सा ही त्याग हो,  
धैर्य हो राम सा, राम सा बलिदान हो ,
मर्यादित हो राम से, सहज सरल स्वभाव हो,
झाँक कर देखो अपने अंतर्मन में क्या तुम राम हो? 

वचनबद्ध हुए पितृ वचन से, माँ की आज्ञा ऐसी मानी, 
राज महल का त्याग कर सब सुख,वन को जाने की है ठानी ,
धर लिया साधु का वेश, प्रभु बन गए सन्यासी ,
कल बनने वाले थे अवध के राजा, 
राम, देखो आज बन गए वनवासी ,
तो कहो, मां-बाप को वृद्‌धाश्रम का रास्ता दिखाने वाले,
माँ का मान, पिता का अभिमान क्या तुम हो ?
झाँक कर देखो अपने अंतर्मन में क्या तुम राम हो ?

दुर्गम था वन का पथ, वनवासी का जीवन आसान कहाँ?
 मंद मुस्कान मुख पर शोभित, चेहरे पर शिकन की रेखा कहाँ?
तो कहो, हर संकट से घबराने वाले मुश्किलों से सकुचाने वाले ,
क्या तुम स्वयं अपनी विपदा का समाधान हो ?
झाँक कर देखो अपने अंतर्मन में क्या तुम राम हो ?

मित्रता के रिश्ते को ऐसे निभाया,
सुग्रीव को दिया राज पाट, राजा निषाद को गले लगाया,
देखो, जाति विभेद को कितने प्रेम से मिटाया ,
शबरी के झूठे बेरों को, बड़े चाव से है खाया ,
तो बात-बात पर जात-पात का ढोंग रचाने वाले ,
 तुम किस मानसिकता के गुलाम हो ?
झाँक कर देखो अपने अंतर्मन में क्या तुम राम हो ? 

जीवन के हर दृष्टांत में, नारी का सम्मान किया,
तारा अहिल्या को स्पर्श मात्र से, शबरी को भी मान दिया,
बात थी, एक स्त्री के स्वाभिमान की, 
पूरे लंका कुल का संहार किया ,
कैकई की इक इच्छा पर, चौदह वर्ष वन विहार किया,
तो कहो, नारी की पीड़ा देख, मौन धरने वालो, 
तुम कैसे इंसान हो ?
झाँक कर देखो अपने अंतर्मन में क्या तुम राम हो?

कर्मों को रखा सर्वोपरि, मर्यादा में हर काम किया,
हे राम जगत के दुखहर्ता, स्वयं संघर्षों को अपने नाम किया,
विपदा थी भी कोई, सहजता से स्वीकार किया, 
स्वयं सह कष्ट सारे, जन जीवन का उद्‌धार किया,
तो कहो, संघर्षपूर्ण इस जीवन में धर्म अविराम हो ,
झाँक कर देखो अपने अंतर्मन में क्या तुम राम हो ?

धर्म-कर्म कर्तव्यों का ज्ञान हमें सिखाया है,
मर्यादा में रह मर्यादा का पाठ हमें पढ़ाया है। 
मातृ -पितृ की भक्ति हो, वहीं निश्चल राष्ट्रप्रेम हो ,
ऐसे कर्तव्य सिखाने, भगवान इंसान बन आएँ हैं ।
राम नाम अलौकिक है, कभी ना बुझने वाली मशाल है ।
होंगे भगवन सनातन के, राम हर मजहब के लिए मिसाल है ।।

तो कहो ! राम के गुणों का तुम कौन-सा भाग हो?
झाँक कर देखो अपने अंतर्मन में क्या तुम राम हो ? 
कहो ! राम के गुणों का तुम कौन-सा भाग हो ?
झाँक कर देखो अपने अंतर्मन में क्या तुम राम हो?

© सोनाली ठाकुर

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